Ham Abstract

भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको)

एल्यूमिनियम सदन, कोर – 6, स्कोप कार्यालय परिसर, लोदी रोड, नई दिल्ली – 110003

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Ham Abstract

स्थायी आजीविका मॉडल के माध्यम से स्थानीय समुदाय को सशक्त बनाते हैं

बालको स्मार्ट तकनीक के माध्यम से ऊर्जा दक्षता, सुरक्षा और सतत विकास को बढ़ावा दे रहा है। कोरबा में यह नवाचार और समुदाय सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्ध है, और पर्यावरण संरक्षण में उद्योग के लिए नए मानक स्थापित कर रहा है।

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प्रशिक्षण प्राप्त युवा

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युवा, वित्तवर्ष 2024 में हुए सशक्त

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किसान लाभान्वित

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जल भंडारण क्षमता (घन मीटर में)

Sustainable Livelihoods Overveiw Image

कृषि में संभावनाओं की नई शुरुआत

कृषि हमारे आसपास के अधिकांश ग्रामीण समुदाय की आजीविका का प्रमुख आधार है। किसानों की आय और जीवन स्तर में सुधार लाने के उद्देश्य से बालको द्वारा ‘मोर जल मोर माटी’ परियोजना संचालित की जा रही है। यह पहल जल संरक्षण और आधुनिक कृषि पद्धतियों के माध्यम से किसानों को स्थायी आजीविका प्रदान करने पर केंद्रित है। अब तक इस परियोजना से 40 गांवों के लगभग 9,400 किसानों को लाभ मिला है।

एकीकृत कृषि मॉडल को बढ़ावा परियोजना के तहत किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों जैसे सिस्टम ऑफ राइस इंटेंसिफिकेशन (एसआरआई), ट्रेलिस खेती, जैविक खेती और बेहतर जल प्रबंधन के बारे में प्रशिक्षण दिया जाता है। साथ ही, वर्षा पर निर्भरता कम करने के लिए कोदो, रागी, मूंगफली और सुगंधित धान जैसी जलवायु-अनुकूल फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

किसानों को प्रशिक्षण और कृषि संबंधी सहायता उपलब्ध कराने के लिए वेदांता एग्रीकल्चर एंड रिसोर्स सेंटर (वीएआरसी) की स्थापना भी की गई है, जो किसानों के लिए एक समग्र सहायता केंद्र के रूप में कार्य करता है।

जल संरक्षण और सिंचाई सुविधाओं का विस्तार परियोजना के अंतर्गत जल सुरक्षा बढ़ाने और बहु-फसली खेती को प्रोत्साहित करने के लिए 203 जल संरचनाओं का निर्माण किया गया है। इनमें सामुदायिक तालाब, लाइनिंग तालाब, चेक डैम और कुएं शामिल हैं। इन संरचनाओं से 2,32,748 घन मीटर जल भंडारण क्षमता विकसित हुई है।

इन प्रयासों से मिट्टी में नमी बनी रहती है, भूजल स्तर में सुधार होता है और किसानों को वर्ष भर खेती करने के अधिक अवसर मिलते हैं।

आजीविका के नए अवसर किसानों की आय के विविध स्रोत विकसित करने के लिए उन्हें मुर्गी पालन, बकरी पालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। बेहतर नस्ल विकास के लिए कृत्रिम गर्भाधान सेवाओं को बढ़ावा दिया गया है तथा वर्ष के दौरान दो पशुधन विकास केंद्र (एलडीसी) स्थापित किए गए।

इसके अलावा, बागवानी और लाख उत्पादन गैर-लकड़ी वन उत्पाद आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देकर किसानों के लिए वर्षभर आय के अवसर सुनिश्चित किए जा रहे हैं।

कृषि को संस्थागत स्वरूप देना ग्रामीण स्तर पर कृषि को संगठित और सशक्त बनाने के लिए ग्राम विकास समितियों (वीडीसी) का गठन किया गया है। साथ ही, कोरबा कृषक उन्नयन प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (केकेयूपीसीएल) नामक किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) की स्थापना की गई है।

यह संगठन किसानों को कृषि सामग्री उपलब्ध कराने और उनके उत्पादों के विपणन में सहायता प्रदान करता है, जिससे उन्हें बेहतर बाजार और उचित मूल्य प्राप्त हो सके।

सरकारी योजनाओं और सामुदायिक सहभागिता का समन्वय परियोजना की दीर्घकालिक सफलता सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंचाया जाता है। साथ ही, तालाब निर्माण, कुआं निर्माण, पोल्ट्री एवं बकरी शेड, मिट्टी संरक्षण, एसआरआई खेती और सिंचाई उपकरणों जैसी गतिविधियों में सामुदायिक सहभागिता को भी प्रोत्साहित किया जाता है।

यह परियोजना बायफ डेवेलपमेंट रिसर्च फाउंडेशन के सहयोग से संचालित की जा रही है।

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बालको ने आधुनिक कृषि तकनीकों पर केंद्रित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाया है। विभिन्न पहल के अंतर्गत बीज, खाद, बाड़बंदी, मृदा परीक्षण और समय-समय पर तकनीकी सहायता जैसे इनपुट समर्थन प्रदान किए गए हैं। परिणामस्वरूप लगभग 50 प्रतिशत किसानों ने सिस्टेमेटिक राइस इंटेंसिफिकेशन (एसआरआई), ट्रेलिस व जैविक खेती तथा जलवायु अनुकूल फसल पद्धतियों जैसी उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाया है। इन प्रयासों से किसानों की पैदावार में 1.3 से 1.4 गुना तक वृद्धि हुई है, जिससे औसतन 50 प्रतिशत की आय बढ़ोतरी और 25-30 प्रतिशत तक खेती की लागत में कमी आई है।

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जलवायु अनुकूल फसल पद्धतियाँ

बालको ने किसानों को जलवायु अनुकूल फसल पद्धतियाँ अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है, जिसमें कोदो और रागी जैसे मिलेट्स, मूंगफली तथा सुगंधित चावल की खेती शामिल है। इन फसलों ने किसानों की आय में 20 से 50 प्रतिशत तक की वृद्धि सुनिश्चित की है। यह नवाचार आधारित पहल किसानों की वर्षा पर निर्भरता को कम करते हुए टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देती है।

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बहुफसली खेती

बालको की सहायता से 2000 किसानों ने रबी सीजन में दूसरी फसल लेना शुरू किया है, जिसमें गेहूं, मूंगफली, सरसों और सब्ज़ियाँ शामिल हैं। सिंचाई सुविधा, तकनीकी मार्गदर्शन और इनपुट समर्थन के माध्यम से यह पहल क्षेत्र में बहुफसली खेती को बढ़ावा देने में सफल रही है।

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बागवानी

बालको ने 125 एकड़ भूमि पर 250 वाड़ी (फलदार बग़ीचे) विकसित किए हैं, जिन्हें अंतर्वर्ती फसलों (इंटरक्रॉपिंग) के साथ एक दीर्घकालिक सतत आजीविका मॉडल के रूप में तैयार किया गया है। यह विविधीकृत कृषि मॉडल किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत प्रदान करते हुए टिकाऊ खेती को प्रोत्साहित करता है।

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पशुपालन के माध्यम से आजीविका में विविधता

बालको ने किसानों की आय में विविधता लाने के उद्देश्य से बकरी, मुर्गी और मत्स्य पालन से जुड़े किसानों को तकनीकी और सामग्री आधारित सहयोग प्रदान किया है। इस सहयोग में प्रशिक्षण, मुर्गी पालन हेतु चूजे, बकरी यूनिट्स तथा मछली बीज की उपलब्धता शामिल है। निरंतर निगरानी और मार्गदर्शन के माध्यम से इन किसानों ने टिकाऊ पशुपालन मॉडल विकसित किए हैं, जिससे उन्हें प्रति वर्ष औसतन ₹52,000 की अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।

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जल संरचनाओं के माध्यम से जल संरक्षण में वृद्धि

बालको ने 28 जल संरचनाएँ विकसित की हैं (25 कृषि, 2 पक्के लाइनिंग और 1 सामुदायिक जलाशय शामिल हैं), जिससे कुल जल भंडारण क्षमता 38,726 घन मीटर तक पहुँच गई है। इस पहल ने सिंचाई की सुविधा को सुदृढ़ करते हुए जल की उपलब्धता बढ़ाई है और क्षेत्र में बहुफसली खेती को प्रोत्साहन मिला है।

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किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के माध्यम से संगठित कृषि व्यवस्था का निर्माण

बालको ने 800 से अधिक किसानों के साथ एक किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) की स्थापना को बढ़ावा दिया है। इस संगठन ने इनपुट और आउटपुट व्यापार केंद्र स्थापित कर ₹20 लाख का वार्षिक कारोबार और ₹7 लाख की इक्विटी पूंजी अर्जित की है, जिससे किसानों को संगठित, टिकाऊ और लाभकारी कृषि की दिशा में सशक्त किया गया है।

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लाख की खेती

गैर-लकड़ी वन उत्पादों को बढ़ावा देने के तहत बालको ने 800 से अधिक किसानों को लाख उत्पादन का प्रशिक्षण एवं आवश्यक सहायता प्रदान की है। यह पहल आजीविका के साधनों में विविधता लाने तथा वनों पर आधारित पारंपरिक आय स्रोतों को भी पुनर्जीवित किया है। लाख उत्पादन से किसान औसतन प्रतिवर्ष ₹50,000 की अतिरिक्त आय प्राप्त कर रहे हैं।

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मिट्टी की मेड़बंदी

बालको की मेड़बंदी पहल से किसानों को काफी लाभ हुआ है। इस प्रयास से खरीफ मौसम में खेतों की जल-धारण क्षमता बढ़ी है और रबी मौसम के लिए मृदा में नमी संरक्षित रही है, जिससे फसल उत्पादकता में सुधार हुआ है।

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वेदांता एग्रीकल्चर रिसोर्स सेंटर (वीएआरसी)

एफपीओ के अंतर्गत स्थापित वीएआरसी किसानों के लिए एक समग्र तकनीकी सहायता केंद्र के रूप में कार्य करता है। केंद्र में हाइड्रोपोनिक्स जैसी नवाचार तकनीकों को अपनाया गया है, जिसके माध्यम से टमाटर, धनिया, पालक और ब्रोकली जैसी फसलें उगाई जा रही हैं। इससे विशेष और प्रीमियम बाजार फसलों की खेती को भी बढ़ावा दिया गया है। एक वर्ष में वीएआरसी ने 31 से अधिक फसलों की खेती कर 93 क्विंटल का कुल उत्पादन प्राप्त किया है।

रोजगार हेतु सक्षम युवा

भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को कुशल मानव संसाधन की आवश्यकता है, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले युवाओं की। छत्तीसगढ़ के कोरबा क्षेत्र में बड़ी संख्या में जनजातीय आबादी निवास करती है, जहां 60 प्रतिशत से अधिक युवा पारंपरिक और अस्थिर आय वाले कार्यों में लगे हुए हैं। युवाओं को रोजगारपरक कौशल प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से बालको ने छत्तीसगढ़ के कोरबा, सरगुजा और कवर्धा में वेदांता स्किल स्कूल स्थापित किए हैं।

इन केंद्रों में ग्रामीण युवाओं को निःशुल्क आवासीय व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है तथा उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ा जाता है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) के दिशा-निर्देशों के अनुसार संचालित किए जाते हैं। यहां युवाओं को वेल्डर, फिटर, हॉस्पिटैलिटी, सिलाई मशीन ऑपरेटर, सोलर पीवी तकनीशियन, मोबाइल रिपेयरिंग और इलेक्ट्रीशियन सहित सात प्रमुख ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया जाता है।

अब तक इन केंद्रों से 13,000 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है। वित्त वर्ष 2026 में 1,202 युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ा गया। इनमें से कई युवाओं को फॉक्सकॉन, वेलस्पन, क्रॉम्पटन ग्रीव्स, अडानी, वोल्वो आइशर, बारबेक्यू नेशन और टाटा मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में अवसर प्राप्त हुए।

समग्र व्यक्तित्व विकास पर विशेष ध्यान तकनीकी प्रशिक्षण के साथ-साथ युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। इनमें शामिल हैं: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित मूल्यवर्धन मॉड्यूल, युवा क्लब (खेल, पर्यावरण, सांस्कृतिक एवं व्यावसायिक गतिविधियां) का संचालन, औद्योगिक भ्रमण एवं उद्योग विशेषज्ञों से संवाद, अग्नि सुरक्षा एवं सड़क सुरक्षा प्रशिक्षण, माहवारी स्वास्थ्य जागरूकता सत्र, कर्मचारी स्वयंसेवकों द्वारा मार्गदर्शन एवं मेंटरशिप, पूर्व विद्यार्थियों (एलुमनाई) से संवाद कार्यक्रम, इन गतिविधियों के माध्यम से युवाओं के आत्मविश्वास, व्यक्तित्व और नेतृत्व क्षमता का विकास किया जाता है।

राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित केंद्र कोरबा स्थित वेदांता स्किल स्कूल को एनएसडीसी के स्किल मैनेजमेंट एंड एक्रेडिटेशन ऑफ ट्रेनिंग सेंटर (स्मार्ट) कार्यक्रम और सेक्टर स्किल काउंसिल (एसएससी) द्वारा छत्तीसगढ़ में 5-स्टार रेटिंग प्रदान की गई है। यह उपलब्धि केंद्र की उत्कृष्ट गुणवत्ता और प्रभावी प्रशिक्षण प्रणाली को दर्शाती है।

केंद्र की इस सफलता के कारण इसे विभिन्न सरकारी एवं निजी संस्थाओं के साथ साझेदारी का अवसर भी प्राप्त हुआ है। इनमें स्किल इंडिया इम्पैक्ट बॉन्ड (एसआईआईबी), जेनरेशन इंडिया, क्रेडिट एक्सेस इंडिया फाउंडेशन (सीएआईएफ) और इंफोसिस के ग्रेजुएट एम्प्लॉयबिलिटी एन्हांसमेंट ट्रेनिंग (जीईईटी) जैसे प्रमुख कार्यक्रम शामिल हैं।

यह परियोजना सोशल एम्पावरमेंट एंड इकोनॉमिक डेवलपमेंट सोसायटी (सीड्स) के सहयोग से संचालित की जा रही है।

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बालको बड्डी